लवण भास्कर चूर्ण(Lavan bhaskar churna) के फायदे और नुकसान

लवण भास्कर चूर्ण(Lavan bhaskar churna)

पेट के रोग जैसे अपच ,कब्ज, बदहजमी आदि इसके लिए लवण भास्कर चूर्ण को उत्तम पाचक चूर्ण के रूप में जाना जाता है। हमारे भोजन का अच्छे ढंग से पाचन न हो तो कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते है | अफारा , वातकफ,अजीर्ण , कब्ज और अंत में त्वचारोग इसके ही कारण पैदा होते है इन सब से बचने के लिए हमे ये सुनिश्चित करना चाहिए की भोजन का ठीक से पाचन हो और पेट साफ़ रहे। ये होगा तो इंसान बहुत सारी बीमारियों से बच जाता है | ऐसे में हमे लवण भास्कर चूर्ण का इस्तेमाल करना चाहिए जो बहुत ही फायदेमंद दवा मानी जाती है |

इसके सेवन से पाचन शक्ति बहुत मजबूत हो जाती है और हम जो भी भोजन ग्रहण करते है उसका पाचन सही ढंग से न होने पर यह भोजन विष बन जाता है लवण भास्कर चूर्ण के सेवन से भोजन अच्छे से पचता है अनपचे विष को बाहर निकालकर पेट को साफ करता है तो शरीर स्वस्थ होता है ।

लवण भास्कर चूर्ण के फायदे

  • बदहजमी में 

अगर आपका पेट साफ नहीं रहता और बार -बार बदहजमी बनती है और खाना ठीक से नहीं पचता तो इसके प्रयोग से यह ठीक हो जाता है | इसके लिए खाना खाने के बाद थोड़ी सी मात्रा में लवण भास्कर चूर्ण हथेली पर रख कर चाट लेने से खाना अच्छे से पचने लगता है ।

  • एसिडिटी (acidity) में लाभकारी 

अग्नि मंद होने से और जठराग्नी ख़राब हो जाने से पाचन बिगड़ जाता है। ऐसा अक्सर अनियमित भोजन करने या पित्त की कमी से होता है. बिगड़े हुए पाचन के कारण भोजन पूरी तरह से पच नहीं पाता और शरीर में बहुत सी पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो जाती हैं. पेट में बहुत अधिक गैस एसिडिटी और बाद में  कब्ज़ हो जाता है. खट्टी डकार, भूख न लग्न, उलटी आना  आदि लक्षण प्रकट हो जाते हैं. पाचन की इन्ही समस्याओ में  इसे भोजन के बाद कुछ दिनों तक पानी या छाछ के साथ लेना चाहिए । नियमित रूप से लेने से अम्लता की समस्या भी नहीं होती ।

  • कोष्ठबद्धता (constipation) होने पर

कभी कभी  कब्ज  होने पर अपानवायु (जो वायु नीचेकी तरफ सरती है) दूषित हो जाती है। फिर सरलता से बाहर नहीं निकल पाती  । परिणामस्वरूप अफारा रहना और किसी को ह्रदयशूल (छातीमे दर्द) उपस्थित  होने लगता है। उसपर यह लवण भास्कर चूर्ण (Lavan Bhaskar Churna) अच्छा लाभ पहुंचाता है। दिनमे 3 बार देना चाहिये। सुबह निवाये (न अधिक ठंडा न गरम) जल से, दोपहर और रात्री को घी के साथ देकर ऊपर निवाया जल पिला दे । इस तरह तीन बार देने पर अग्निमांद्य, अफरा, शूल (पेट दर्द) आदि दूर हो जाते है।

  • अर्श (Piles) रोग

अर्श (Piles) रोग की उत्पत्ति अग्नि मंद होने कारण ही होती है जब अग्नि मंद हो जाती है तो कब्ज रहने लगती है । पेट में वायु भरी रहती है । पाचन बिलकुल काम करना बंद कर देता है । रोगी जब पेट साफ़ करने का प्रयास  करता है  तो उसको अर्श रोग हो जाता है ।अतः अर्श रोग में अग्नि प्रदीप्त करने के लिये लवण भास्कर चूर्ण का  के साथ सेवन कराया जाता है।

  • ग्रहणी रोग(colitis)

ये एक ऐसा रोग है जिसमे आंते अपना काम करना बिलकुल बंद कर देती है । पेट में सूजन रहने लगती है । पुरे दिन पेट में दर्द और दस्त की शिकायत बनी रहती है रोगी दिन पर दिन कमजोर होता जाता है । अंत में उसका वजन बहुत अधिक मात्रा में काम हो जाता है, आयुर्वेद में इस रोग को ग्रहणी रोग या संग्रणी कहा जाता है । एलोपैथी में इसको कोलायटिस के नाम से भी जाना जाता है ऐसे रोगियों को लवण भास्कर चूर्ण मट्ठे के साथ देते रहने से कुछ ही दिनों में रोगी ठीक होने लगता है और उसकी भूक भी खुल जाती है ।

लवण भास्कर चूर्ण के नुकसान

लवण भास्कर चूर्ण जैसे की नाम से ही पता चलता है की ये  नमक से बना होता है अर्थात इसमें मुख्य ओसधि विभिन्न प्रकार क नमक ही है इसलिए इसका इस्तेमाल उच्च रक्तचाप के रोगियों में सावधानी से करना चाहिए। सामान्य रोगो में सेवन करने पर लवण भास्कर चूर्ण का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है । यह एक सुरक्षित ओसधि है ।

 

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